“ मेरी सहेली ”
मेरी सहेली
जब मैं तुमसे
बिछड़ रही थी
मेरी जिंदगी ही
जब मुझसे
रूठ रही थी
जब तुम केवल
बहा रही थी
अश्रु धाराएँ
मैं मौन खड़ी
तब तुम्हें
निहार रही थी
मेरे मस्तिष्क में
बस यही विचार
आ रहे थे
अब किसे
सुनाऊंगी
अपनी कथा
और तुम किसे
सुनाओगी
अपनी व्यथा
बस एक
तुम ही हो
जो मेरे ह्रदय के
बहुत करीब हो
तुमसे बिछड़ कर
मेरी जिंदगी
बहुत गरीब है l
अलका सिंह