“ मायूसियों की आँधियाँ ”
मायूसियों की आँधियाँ
कुछ इस तरह से
झकझोरती है हमें
जिन्दगी के हर एहसास से
मुँह मोदते है हम l
ज़माने की बेड़ियों से
कुछ इस कदर से
जकड़े हुए है हम
जिन्दगी में दो कदम
आगे बढ़ने से
डरते है हम l
तक़दीर की हथकड़ियों से
कुछ इस कदर से
बंधे हुए है हम
जिन्दगी में दो पल
जीने से भी
डरते है हम l
अलका सिंह