“ मैं तुम पर लिखना चाहती हूँ कोई कविता ”
मैं तुम पर
लिखना
चाहती हूँ
कोई कविता
जब
मैं
बैठी होती हूँ
तुम्हारी ही
यादों में
खोयी हुयी
हजारों पंक्तियाँ
मेरे मस्तिष्क
पर छा जाती हैं
जिसे किसी
एक कविता
में लिखना
बड़ा मुश्किल है l
मैं तुम पर
लिखना
चाहती हूँ
कोई कविता
जब मैं
बैठी होती हूँ
अपने ही
उदास क्षणों
के साथ
हजारों रंग
मेरी आँखों
के सामने
फ़ैल जाते हैं
जिसे किसी
एक तस्वीर
में रंगना
बड़ा मुश्किल है l
मैं तुम पर
लिखना
चाहती हूँ
कोई कविता
जब मैं
बैठी होती हूँ
अपने ही
उदास लम्हों
के साथ
हजारों मोती
मेरी आँखों
के सामने
बिखर जाते हैं
जिसे किसी
एक माला
में पिरोना
बड़ा मुश्किल है l
मैं तुम पर
लिखना
चाहती हूँ
कोई कविता
तुम्हारे ही
सम्पूर्ण व्यक्तित्व पर
एक व्याख्यान
जिसे लिखना
बड़ा मुश्किल है
मैं तुम पर
लिखना
चाहती हूँ
कोई कविता.........
अलका सिंह